नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा जिस स्थान पर आप सभी बैठे हैं, वो भारत की डेमोक्रेटिक जर्नी का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। गुलामी के आखिरी वर्षों में जब भारत की आजादी तय हो चुकी थी, उस समय इसी सेंट्रल हॉल में भारत के संविधान की रचना के लिए संविधान सभा की बैठकें हुई थीं। भारत की आजादी के बाद 75 वर्षों तक ये इमारत भारत की संसद रही और इसी हॉल में भारत के भविष्य से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण निर्णय, अनेक चर्चाएं हुईं। अब लोकतंत्र को समर्पित इस स्थान को भारत ने संविधान सदन का नाम दिया है। कुछ समय पहले ही भारत के संविधान को लागू हुए 75 वर्ष हुए हैं। मैं इस संविधान सदन में आप सभी अतिथियों का आना भारत के लोकतंत्र के लिए बहुत विशेष है।
नरेन्द्र मोदी ने कहा ये चौथा अवसर है, जब कॉमनवेल्थ स्पीकर्स और Presiding Officers की कॉन्फ्रेंस भारत में हो रही है। इस बार इस कॉन्फ्रेंस का मुख्य विषय ‘Effective Delivery of Parliamentary Democracy’ है। आप सभी जानते हैं कि जब भारत आजाद हुआ, तो उस दौर में ये आशंका व्यक्त की गई थी कि इतनी डायवर्सिटी में, भारत में लोकतंत्र टिक नहीं पाएगा। लेकिन भारत ने इसी डायवर्सिटी को डेमोक्रेसी की ताकत बना दिया। एक सबसे बड़ी आशंका ये भी थी कि अगर भारत में लोकतंत्र जैसे, अगर जैसे-तैसे टिक भी गया, तो भारत किसी भी हालत में विकास नहीं कर पाएगा। लेकिन भारत ने साबित किया कि डेमोक्रेटिक इंस्टीट्यूशंस और डेमोक्रेटिक प्रोसेसेस, डेमोक्रेसी की स्टेबिलिटी, स्पीड और स्केल, तीनों देते हैं। भारत दुनिया की फास्टेस्ट ग्रोइंग मेजर इकोनॉमी है। आज भारत में UPI दुनिया का सबसे बड़ा digital payment system है। आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा vaccine producer है। आज भारत दुनिया का नंबर-2 steel producer है। आज भारत में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा startup ecosystem है। आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा aviation market है। आज भारत में दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। आज भारत में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो रेल नेटवर्क है। आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा milk producer है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा rice producer ह ।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा भारत में Democracy का अर्थ, Last Mile Delivery है। हम एक लोक कल्याण की भावना से हर व्यक्ति के लिए बिना किसी भेदभाव के काम कर रहे हैं। और इसी लोक कल्याण की भावना के कारण बीते कुछ वर्षों में भारत में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं भारत में डेमोक्रेसी इसलिए डिलीवर करती है, क्योंकि हमारे देश में और भारत में देश की जनता ही हमारे लिए सर्वोपरि है। हमने उसकी Aspirations को, जनता-जनार्दन के सपनों को प्राथमिकता बनाया है। उसके रास्ते में कोई बाधा ना आए, इसके लिए Process से लेकर Technology तक, हर चीज को Democratize किया है, और ये Democratic Spirit हमारी रगों में, हमारे मन में है, हमारे संस्कार में है। मैं आपको एक उदाहरण देता हूं, कुछ साल पहले, पूरा विश्व कोरोना की आपदा से जूझ रहा था, भारत में भी संकट कम नहीं था, लेकिन उन चुनौतियों के बीच भी भारत ने डेढ़ सौ से ज्यादा देशों को दवाइयां और वैक्सीन पहुंचाई। लोगों का हित, लोगों की भलाई और उनका कल्याण, ये हमारा संस्कार है, और ये संस्कार हमें हमारे लोकतंत्र ने दिए हैं।
नरेन्द्र मोदी ने कहा कॉमनवेल्थ की कुल जनसंख्या का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा भारत में बसता है। हमारा प्रयास रहा है कि भारत सभी देशों के विकास में ज्यादा से ज्यादा योगदान दे। Commonwealth के Sustainable Development Goals में, Health, Climate Change, Economic Growth और Innovation के क्षेत्र में, हम पूरी जिम्मेदारी के साथ अपने Commitments को पूरा कर रहे हैं। भारत आप सभी साथियों से सीखने का निरंतर प्रयास करता है। और हमारा ये भी प्रयास होता है कि भारत के अनुभव अन्य कॉमनवेल्थ पार्टनर्स के काम आएं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा आज जब दुनिया अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुज़र रही है, तब ग्लोबल साउथ के लिए भी ये नए रास्ते बनाने का समय है। भारत हर ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर ग्लोबल साउथ के हितों को पूरी मजबूती से उठा रहा है। अपनी G20 अध्यक्षता के दौरान भी भारत ने ग्लोबल साउथ की चिंताओं को वैश्विक एजेंडे के केंद्र में रखा है। भारत का ये लगातार प्रयास है कि हम जो भी इनोवेशन करें, उससे पूरे ग्लोबल साउथ को लाभ हो, कॉमनवेल्थ देशों को फायदा हो। हम ओपन सोर्स टेक प्लेटफॉर्म भी बना रहे हैं, ताकि ग्लोबल साउथ के हमारे साथी देश भी अपने यहां भारत जैसी व्यवस्थाएं विकसित कर सकें।
नरेन्द्र मोदी ने कहा इस बार की कॉन्फ्रेंस का एक प्रमुख लक्ष्य ये भी है कि कैसे हम अलग-अलग तरीकों से पार्लियामेंट्री डेमोक्रेसी की नॉलेज और अंडरस्टैंडिंग को प्रमोट करें। इसमें स्पीकर्स और प्रिसाइडिंग ऑफिसर्स दोनों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। ये काम लोगों को देश के डेमोक्रेटिक प्रोसेस में बड़ी भूमिका से जोड़ने का काम है। भारत की संसद पहले से ही, ऐसे काम को कर रही है। स्टडी टूर्स, कस्टमाइज्ड ट्रेनिंग प्रोग्राम्स और इंटर्नशिप के माध्यम से जनता को, संसद को और करीब से जानने का मौका मिला है। हमने अपनी संसद में AI की मदद से डिबेट्स और हाउस प्रोसिंडिग्स को Real Time में, Regional Languages में ट्रांसलेट करने का काम शुरू किया है। संसद से जुड़े रिसोर्सेज को भी, AI की मदद से User Friendly बनाने का काम हो रहा है। और इससे हमारी यंग जेनरेशन को भी संसद को समझने, उनको बेहतर अवसर मिल रहा है।