चिन्मय मिशन ने दशकों से चली आ रही सेवा और भारत के आध्यात्मिक ज्ञान को दुनिया के साथ साझा किया है:नरेन्द्र मोदी

                      नई दिल्ली-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली स्थित भारत पैगाम में चिन्मय अमृत महोत्सव विश्व सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने संतों के स्नेह और आशीर्वाद से प्राप्त गहरी आध्या त्मिक भावना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चिन्मय मिशन केवल एक संस्था नहीं है, बल्कि एक अमर निजी है, इसकी स्थापना एक ऋषि ने की है और जो दशकों के पवित्र संकल्पों से प्रेरित है। इसी सन्दर्भ में उन्होंने इस सम्मेलन के नाम की सार्थकता को दर्शाया। मोदी ने कहा कि आधुनिक तकनीक ने होलोबोट के माध्यम से श्रद्धेय गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद के साथ संवाद को संभव बनाया और इस कार्यक्रम को भी बनाया। इस अनुभव का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था कि ये उन्हें 33 साल पहले 1993 में वडोदरा में गुरुदेव से हुई मुलाकात की यादों में ले गए थे। गुरुदेव की आत्मीयता, संवाद और आशीर्वाद का स्मरण करते हुए उन्हें ऐसा लगा, मानो वे एक बार फिर उनकी साक्षात् उपस्थिति में रहें। उन्होंने मिशन के सदस्यों के लिए भावपूर्ण श्रद्धांजली दी और कहा कि यह उनके लिए बेहद सामान्य अनुभव है।

                      प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा विवेकानंद के ऐतिहासिक दर्शन के 100वें वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में विश्व धर्म संसद के शताब्दी समारोह में शिकागो में स्वामी चिन्मयानंद को आमंत्रित करने के लिए फरवरी-मार्च 1993 में उन्हें याद करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि कैसे गुरुदेव ने 3 अगस्त को सैन डिएगो में निधन होने से पहले इस समारोह में पूरे अमेरिका के लोगों को एकजुट करने का भरपूर प्रयास किया था। प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि 11 सितंबर को शिकागो में आयोजित सभा में गुरुदेव की अनुपस्थिति में कितनी गहराई मह सूस की गई थी। उन्होंने गुरुदेव के साथ अपनी अंतिम बातचीत का भी उल्लेख किया, जो युवा शक्ति को विक सित करने पर केन्द्रित था। श्री मोदी ने कहा कि उस संवाद का मूल सार युवा शक्ति का निर्माण करना था और उनके माध्यम से एक मजबूत और सक्षम भारत का निर्माण करना था।
                     नरेंद्र मोदी ने कहा उस बैठक के कुछ वर्षों बाद गुजरात के मुख्यमंत्री के पद से लेकर सरकार के प्रमुखों के रूप में निरंतर सेवा की अपनी 25 साल की यात्रा का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के युवा हमेशा अपने समुदायों के केंद्र में रहे हैं। उन्होंने चिन्मय अमृत महोत्सव में युवाओं की 300 दिन की 40,000 किमी की यात्रा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और एक लाख से अधिक युवा कार्यकर्ताओं को शामिल किया। प्रधानमंत्री ने इस अद्भुत प्रयास के लिए पूरी टीम को बधाई दी। उपनिषद के "वयम् अमृतस्य पुत्र" श्लोक का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था कि भारत सहस्रादिकों से ज्ञान और प्रकाश का साधक बना है, क्योंकि उनके अपने और ज्ञान अमर हैं। इसी भावना ने स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ पर अमृत महोत्सव का आवाहन करने की प्रेरणा दी। यह महोत्सव मानव कल्याण के साथ-साथ विकसित भारत की सहस्राब्दियों की पुरानी कलाकृतियों को पुनर्जीवित करने का अवसर भी प्रदान करता है। उन्होंने उल्लेख किया कि अनेक आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विद्वानों ने पवित्र संकल्पों के लिए महत्वपूर्ण उपदेश दिए हैं और देश के अमृत काल अभियान में चिन्मय मिशन की प्रतिज्ञा का स्वागत किया गया है। कि यह हमारा "अमृतस्य पुत्र" होने का सच्चा प्रमाण है।

                   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा राष्ट्र को जागृत करने और अपने आंदोलन के लिए वैदिक विद्वान "वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः" का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वामी चिन्मयानंद ने राष्ट्रीय आक्षेप पर भी बहुत ही मुखरता से विचार रखा, जैसा कि आध्यात्मिकता पर है। उन्होंने सिखाया कि राष्ट्र हमारी संस्कृति और दृष्टिकोण का आधार है, इसलिए आध्यात्मिक विकास को व्यक्तिगत विकास के साथ-साथ राष्ट्रीय प्रगति का भी माध्यम बनाना चाहिए। राष्ट्रीय जापान जगने और उपनिषदों, वेदांत और सिद्धांतों का ज्ञान जन-जन तक के लिए स्वामीजी ने ज्ञान गीता यज्ञ की शुरुआत की। इसी प्रेरणा से आज चिन्मय मिशन के लाखों युवा सांस्कृतिक दूत बनकर भारतीय लोकतंत्र को आगे बढ़ा रहे हैं। श्रद्धेय गुरुदेव का यह योगदान भारत के सांस्कृतिक और दार्शनिक का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। 2015 में गुरुदेव की जन्मशताब्दी के अवसर पर हुए स्मारक सिक्कों की मुक्ति को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने स्वामीजी के जीवन के बारे में ज्ञान, कर्म और भक्ति का अद्भुत संगम बताया। उन्होंने कहा कि स्वामीजी ने अपने गुरु स्वामी शिवानंद का आशीर्वाद दिया था  "जाओ, शेर की तरह दहाड़ो" को सार्थक किया। स्वामीजी की आवाज में झलकते अनुयायी और आंतरिक शक्ति ने नेपोलियन के दिल पर उनके विचारों की अमित छाप छोड़ी। वहीं, उनके आर्ट ऑफ मैन रियो रेडियो प्रोग्राम ने अनगिनत लोगों को जीवन में निर्देशित किया।

                    नरेंद्र मोदी कहा महान स्टूडियो का मिशन उनके प्रयोगशाला के बाद भी जारी है - इस बात की चर्चा करते हुए प्रधान मंत्री ने चिन्मय मिशन की स्थापना की और व्यापक पुस्तकालय नेटवर्क को प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश भर में 100 से अधिक चिन्मय अकादमी संस्थान लाखों विद्यार्थियों के भविष्य को आकार दे रहे हैं। इन छात्रों में आधुनिक शिक्षा प्राप्त करने के साथ-साथ भारतीय छात्रवृति को भी प्रमाणित किया जा रहा है।स्वामी चिन्मयानंद जैसे विचारकों की स्वतंत्रता के बाद की परिकल्पना को वर्तमान शासन के सिद्धांतों से प्रेरित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश नए भारत के निर्माण के लिए शिक्षा को आधुनिक बनाने का अपना सक्रिय दायित्व निभा रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लेख किया, जिसमें भारतीय ज्ञान परंपरा, मातृभाषा में शिक्षा, आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी को एक साथ समाहित किया गया है। श्री मोदी ने कहा कि नई शिक्षा नीति में सभी मानक शामिल हैं।

                 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा भारतीय विरासत संरक्षण के प्रतिनिधि स्वामीजी के अवकाश समारोह में प्रकाश डालते समय प्रधानमंत्री को याद आया कि गुरुदेव ने कन्याकुमारी में समुद्र के बीच स्थित अरुणाचल रॉक मेमोरियल के निर्माण के लिए एकनाथ रानाडे के दृढ़ संकल्प का समर्थन किया था और इस परियोजना के लिए पहला आर्थिक योगदान भी दिया था। उन्होंने कहा कि आज यह स्मारक दुनिया भर के लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारतीय विरासत पर गर्व करना और उसकी रक्षा करना स्वामीजी के जीवन का एक और मिशन था।