चिप्स से लेकर जहाजों तक, भारत अब विनिर्माण क्षेत्र के नए भविष्य का निर्माण कर रहा है: प्रधानमंत्री

 

उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ दिल्ली भर में भवन सुरक्षा, छात्र आवास और पीजी नियमों पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की
उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ दिल्ली भर में भवन सुरक्षा, छात्र आवास और पीजी नियमों पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मंत्री आशीष सूद, मुख्य सचिव, महानिदेशक एनडीआरएफ,दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार मौजूद थे।
उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ दिल्ली भर में भवन सुरक्षा, छात्र आवास और पीजी नियमों पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की जिसमें असुरक्षित भवनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, स्पष्ट संस्थागत जवाबदेही और त्वरित शिकायत निवारण और संकट समन्वय के लिए डीडीएमए के तहत एक आपातकालीन तंत्र पर जोर दिया। जीएनसीटीडी के शहरी विकास मंत्री (यूडी) को संबंधित वरिष्ठ अधि कारियों के साथ एक समिति का नेतृत्व करने का निर्देश दिया, ताकि संस्थागत पीजी दिशानिर्देशों की समीक्षा की जा सके, विश्वविद्यालयों, एमसीडी और डीडीए के माध्यम से वैकल्पिक छात्र आवास की खोज की जा सके और छात्र आवास के लिए अप्रयुक्त डीडीए आवास स्टॉक के उपयोग की व्यवहार्यता का आकलन किया जा सके।
उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ दिल्ली भर में भवन सुरक्षा, छात्र आवास और पीजी नियमों पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।

चिप्स से लेकर जहाजों तक, भारत अब विनिर्माण क्षेत्र के नए भविष्य का निर्माण कर रहा है: प्रधानमंत्री
                 नई दिल्ली-प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा आज मैं विकसित भारत की यात्रा को और गति देने के लिए आपके बीच आया हूं। थोड़ी देर पहले यहां देश के विकास से जुड़े हज़ारों करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। मैं देश की जनता को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। इस विकास पर्व पर आप सभी ने जिस सेवा भाव से और सेवा भाव के साथ पूरे वडोदरा शहर में स्वच्छता से स्वागत अभियान चलाया है, इसके लिए मैं 
वड़ोदरा के हर एक नागरिक को ह्दय से बहुत-बहुत बधाई देता हूं, उनकी सराहना करता हूं। और ये जो आपने रंग दिखाया ना, मैं कल एक वीडियो देख रहा था, सीना चौड़ा हो गया, वाह! क्या ये मेरा वडोदरा है? और अब तो गणे शोत्सव की तैयारी, बाद में नवरात्रि। और गणेशोत्सव और नवरात्रि पूरा गुजरात का ध्यान वडोदरा पर होता है। और आज आपने, मैं देख रहा था पिछले एक सप्ताह से हर परिवार में वातावरण बन गया है स्वच्छता का। मुझे लगता है कि इस बार जब गणेश जी पधारेंगे ना, सारे आशीर्वाद वड़ोदरा पर बरसने वाले हैं।
                  नरेन्द्र मोदी ने कहा इस वर्ष लाल किले से मैंने विकसित भारत के लिए संकल्प की सप्तधारा का आह्वान किया है। इस सप्तधारा में एक धारा गतिशक्ति की भी है। विकसित भारत के लिए हमें ऐसी कनेक्टि विटी चाहिए, जो सुगम भी हो और जमाने के हिसाब से जरा तेज भी हो। वड़ोदरा तो गतिशक्ति यूनिवर्सिटी का शहर है। आज यहां से डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की आखिरी कड़ियां भी जुड़ गई हैं। आज 2800 किलोमीटर से अधिक का डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर प्रोजेक्ट पूरा हो गया। ये 21वीं सदी के भारत के लिए बहुत ऐतिहासिक कार्य संपन्न हुआ है।
            प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा ये डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, इस बात का साक्षी है कि बीते 12 साल में देश की काम करने की संस्कृति कैसे बदली है। इस डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर 2004 में विचार शुरू हुआ था। यानी, यहां मैं सारे नौजवान देख रहा हूं, जब इसका विचार शुरू हुआ, आप में से बहुत लोग होंगे जिनका जन्म भी नहीं हुआ होगा, उस समय शुरू हुआ था। 2006 में एक विशेष कंपनी बनाई गई इस काम को करने के लिए और फिर 2014 तक फाइलें ही यहां से वहां होती रहीं। फाइलें टेबल पर यात्रा कर रही थी और दुर्भाग्य देखिए, इन फाइलों को भी कोई डेडिकेटेड कॉरिडोर नसीब नहीं हुआ, फाइल को भी नहीं नसीब हुआ। फाइलें अटकती थीं, लटकती थीं, भट कती थीं। और 2014 में वड़ोदरा के और गुजरात के और देश के लोगों ने मुझे गुजरात से निकाल करके दिल्ली भेज दिया। पहले वाली सरकार 2000 तक रही। आपने मुझे भेजा और उनकी विदाई हुई, और सच्चाई ये थी कि सात-आठ वर्ष में, जरा मेरे नौजवान सुन लीजिए, ये याद रखिए, सात-आठ वर्ष में एक किलोमीटर फ्रेट कॉरिडोर पर भी काम पूरा नहीं हो पाया था। अगर उनके हिसाब से देश चलाते, तो पता नहीं आपके बाद तीन-चार पीढ़ियां आती, तो भी नहीं होता। भारत के लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम को ट्रांसफॉर्म करने वाले प्रोजेक्ट की ये हालत करके रखी थी।
                नरेन्द्र मोदी ने कहा 2014 के बाद आपने जो मुझे शिक्षा-दीक्षा दी थी, इस धरती ने मुझे जो सिखाया था, आपके पास से जो लेसन लेके मैं दिल्ली पहुंचा था, हमने वहां पहुंचते ही इसको गति देने का काम प्रारंभ कर दिया। 2800 किलोमीटर के कॉरिडोर का काम आज पूरा करके दिखाया। और आज ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, देश के व्यापार-कारोबार का मुख्य आधार बन रहा है।
            प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, तेजी से विकसित होते भारत की जीवन रेखा है। इसने भारत के ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर का कायाकल्प कर दिया है। पहले पैसेंजर ट्रेन जिस ट्रैक पर चलती थी, उसी ट्रैक पर मालगाड़ी भी चलती थी। यानि ट्रैवल और ट्रांसपोर्ट, दोनों धीमा था। लेकिन, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर ने इस स्थिति को बदल दिया है। आज पूर्वी और पश्चिमी फ्रेट कॉरिडोर्स पर हर रोज़ 430 से ज्यादा मालगाड़ियां चलती हैं, प्रतिदिन 430 मालगाड़ी। और पहले जो मालगाड़ी, साढ़े 6 घंटे में 100 किलोमीटर का सफऱ तय करती थी और अब वही मालगाड़ी आधे से भी कम समय में 100 किलोमीटर का सफर तय कर लेगी। जिस जगह पर ट्रक से सामान भेजने में सामान्य तौर पर 30 घंटे लगते हैं, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर यही दूरी 10-12 घंटे में पूरी हो जाती है। यानि, इस कॉरिडोर पर मालगाड़ी के चलने से ट्रक और ट्रेन में लगने वाला फ्यूल बचता है, किराया-भाड़ा का खर्च कम हुआ है, समय बचा है, पर्यावरण को फायदा हुआ है। यानि, इन्वेस्टमेंट एक ट्रैक पर किया और फायदे अनेक सारे हुए हैं।
               नरेन्द्र मोदी ने कहा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, तेजी से विकसित होते भारत की जीवन रेखा है। इसने भारत के ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर का कायाकल्प कर दिया है। पहले पैसेंजर ट्रेन जिस ट्रैक पर चलती थी, उसी ट्रैक पर मालगाड़ी भी चलती थी। यानि ट्रैवल और ट्रांसपोर्ट, दोनों धीमा था। लेकिन, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर ने इस स्थिति को बदल दिया है। आज पूर्वी और पश्चिमी फ्रेट कॉरिडोर्स पर हर रोज़ 430 से ज्यादा मालगाड़ियां चलती हैं, प्रति दिन 430 मालगाड़ी। और पहले जो मालगाड़ी, साढ़े 6 घंटे में 100 किलोमीटर का सफऱ तय करती थी और अब वही मालगाड़ी आधे से भी कम समय में 100 किलोमीटर का सफर तय कर लेगी। जिस जगह पर ट्रक से सामान भेजने में सामान्य तौर पर 30 घंटे लगते हैं, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर यही दूरी 10-12 घंटे में पूरी हो जाती है। यानि, इस कॉरिडोर पर मालगाड़ी के चलने से ट्रक और ट्रेन में लगने वाला फ्यूल बचता है, किराया-भाड़ा का खर्च कम हुआ है, समय बचा है।
                 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा पर्यावरण को फायदा हुआ है। यानि, इन्वेस्टमेंट एक ट्रैक पर किया और फायदे अनेक सारे हुए हैं। इस फ्रेट कॉरिडोर से पूर्वी और पश्चिमी भारत के किसानों की उपज अब तेज़ी से बड़े बाज़ार तक पहुंच पा रही है। कई तरह के फूल, कई तरह की सब्जियां, कई तरह के फल, यानि जो चीजें मौसम के हिसाब से जल्दी खराब होती हैं, उनके लिए भी सही समय पर मंडियों और लोगों के बीच पहुंचने का रास्ता बना है। इससे किसान का बहुत बड़ा फायदा हुआ है।ये फ्रेट कॉरिडोर एक और वजह से कमाल का है। हाल ही में JNPT मुंबई, JNPT पोर्ट से वड़ोदरा तक Double स्टैक Container मालगाड़ी का संचालन किया गया है। यानि डिब्बे के ऊपर एक और डिब्बा लगाकर मालगाड़ी को चलाया गया। इस मालगाड़ी के चलने से एक बार में ही 250 से अधिक ट्रकों के बराबर का सामान मुंबई से वड़ोदरा चला आया, 250 ट्रक। अब ये जो नाराज फूफा जी है, वो चिल्लाएंगे कि ट्रक वालों का क्या होगा? ट्रक कहां जाएंगे? जिन्होंने ट्रक खरीदा है, उनका क्या होगा? अब फूफा जी को काम मिल गया। यानि अब बड़ी मात्रा में सामान तेजी से देश के एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंच पाएगा।
               नरेन्द्र मोदी ने कहा रोड, रेल, मेट्रो, एयरपोर्ट, गैस पाइपलाइन, गरीबों का घर, जब देश में करोड़ों लोगों के लिए ये चीजें बनती हैं, तो इससे लोगों का जीवन आसान होता है और साथ ही छोटे से बड़े कामगार को रोजगार के लाखों-लाख अवसर मिलते हैं। आप रेलवे का ही देखिए, इस वर्ष का रेल बजट पौने तीन लाख करोड़ रुपए से अधिक रहा है। जो 12 वर्ष पहले की तुलना में कई गुणा अधिक है। यानि रेलवे के आधुनिकीकरण पर हो रहा खर्च, हज़ारों हज़ार नए रोजगार बना रहा है। और ये रोजगार कंस्ट्रक्शन के दौरान तो बनता ही है। एक बार रोड, रेल, पाइपलाइन, पोर्ट, एयरपोर्ट बन गया, तो फिर उसके आसपास नए उद्योग लगना शुरू हो जाते हैं, नए बिजनेस आते हैं, ये फिर नए रोजगार बनाते हैं। वहां कुछ लोग, वो बेटी चित्र लेकर कब से खड़ी है, वो सज्जन भी कुछ कला लेकर के आए हैं। जरा हमारे साथी उसको कलेक्ट कर लें। ये आगे पहुंचा दीजिए, हां। एक और भी है कोई, हां, ले लीजिए। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
                 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा अब भारत चिप से लेकर शिप तक, निर्माण की एक नई गाथा लिख रहा है। यानि पुर्जे भी हमारे और प्रोडक्ट भी हमारा, आत्मनिर्भरता की एक पूरी चेन भारत में ही बनेगी। और ये हम सोलर पावर के मामले में देख रहे हैं। जैसे कडाणा डैम पर जो फ्लोटिंग सोलर प्लांट का प्रोजेक्ट है, कुछ साल पहले तक देश में सोलर प्रोजेक्ट्स लगाने बहुत महंगे पड़ते थे। क्योंकि पीवी मॉड्यूल से लेकर, हर प्रकार का हार्डवेयर इंपोर्ट करना पड़ता था। लेकिन बीते वर्षों में हमने भारत में ही पीवी मॉड्यूल बनाने शुरु किए। और आज हम इसमें 200 गीगावॉट से ज्यादा की कैपेसिटी विकसित कर चुके हैं। और ऐसी ही आत्मनिर्भरता के कारण आज पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का विस्तार हो रहा है। अब तक देश में 55 लाख परिवार अपने छत पर, टेरेस पर सोलर प्लांट लगा चुके हैं। और इसमें 11 लाख परिवार हमारे गुजरात के हैं। यहां इतने सारे परिवार, बिजली उत्पादक बन चुके हैं और इसके कारण, प्रोडक्शन से लेकर इंस्टॉलेशन और सर्विस तक, कितने ही युवाओं को रोजगार मिला है, कितने नए वेंडर्स आए हैं।



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