नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा इस समय देश के ज्यादातर हिस्सों में बहुत गर्मी पड़ रही है | तेज धूप, गर्म हवाएँ, ऐसे मौसम में अपना ध्यान रखना बहुत जरूरी है | पानी पीते रहिए | धूप में अगर निकलना ही पड़े तो थोड़ा संभल कर निकलें | इस दिशा में सरकार की भिन्न-भिन्न departments ने जो guidelines जारी की है वो भी भूलियेगा नहीं हमारे यहां गर्मी से लड़ने का तरीका कई बार रसोई में भी मिलता है | आपने भी देखा होगा जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, वैसे-वैसे घर की रसोई का स्वाद बदल जाता है, रसोई का प्रकार बदल जाता है | कहीं मटके का पानी निकल आता है, कहीं दही जमने लगता है, तो कहीं कच्चे आम उबलने लगते हैं - और फिर शुरू होता है देसी पेय का दौर | देसी पेय से आप भी परिचित हैं, अगर आप उत्तर भारत में जाएँगे तो काफी जगह आपको मिलेगा आम पन्ना, कच्चे आम का स्वाद, और गर्मी से राहत भी | पंजाब-हरियाणा जाइए तो लस्सी मिल जाएगी, बड़े गिलास वाली लस्सी | राजस्थान और गुजरात में छाछ, जैसे हर खाने की साथी बन जाती है | और बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश में सत्तू का शरबत, उसकी तो बात ही क्या है - पेट भी भरे, ताकत भी दे | कोंकण और गोवा में कोकम शरबत, सोल कढ़ी | दक्षिण भारत में पानकम, नीर मोर, सम्बारम और ओडिशा में बेल पना, वो सिर्फ पेय नहीं, भारत के अलग-अलग क्षेत्रों की परंपरा का हिस्सा है | और इसमें ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना की झलक भी मिलती है | और एक बात जरूर ध्यान रखियेगा, इनमें से ज्यादातर चीजें हमारी अपनी रसोई से निकली हैं, हमारे खेत खलिहान से निकली हैं | कोई बड़ी branding नहीं है| लेकिन पीढ़ियों का अनुभव उनमें समाया हुआ है | आप भी गर्मी के दौरान देसी पेजयलों का खूब आनंद लीजिए |।
नरेन्द्र मोदी ने कहा गर्मी आते ही एक और चर्चा हर घर में शुरू हो जाती है और वो है आम | आम, आम चर्चा का विषय होता है, भारत में शायद ही कोई घर होगा जहाँ गर्मियों में आम की बात न होती हो | हर इलाके का अपना आम, अपना स्वाद, अपनी खुशबू | महाराष्ट्र और कोंकण का हापुस, alphonso, गुजरात का केसर, यह तो आमरस की जान है , उत्तर प्रदेश का दशहरी और मेरी काशी का लंगड़ा | वैसे, लंगड़ा आम की एक खास बात होती है - पकने के बाद भी उसका रंग कई बार हरा ही रहता है | बिहार का जर्दालू जिसकी खुशबू दूर से पहचान में आ जाए | चौसा, मालदा - हर नाम के साथ लोगों की यादें जुड़ी हुई हैं | दक्षिण भारत जाइए, तो बंगनपल्ली, तोतापुरी, नीलम, मलगोवा, बंगाल का हिमसागर, ओडिशा और आंध्र प्रदेश का सुवर्णरेखा | यानी, जगह बदलती है, आम का रूप-रंग और उसका स्वाद भी बदल जाता है | और साथियो आम की ये यात्रा, अब गाँव से, global market तक भी पहुँच रही है | आज ‘मन की बात’ के माध्यम से मैं आम की पैदावार से जुड़े अपने किसान भाई-बहनों की प्रशंसा करूंगा | आप देश की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए आम किसान नहीं बहुत विशेष हैं | ऐसे ही छाए रहिए ।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा गर्मी के इन दिनों में, ऐसे तो स्कूलों की छुट्टियां होती हैं, लेकिन, मैं एक ऐसी class की बात करूंगा, जिसमें आपका admission करने का मन कर जाएगा । साथियो, एक स्थिति की कल्पना कीजिए, एक ऐसा school जहाँ बच्चे भी आते हों, युवा भी और बुजुर्ग भी, जहाँ कोई fees ना हो, कोई बड़ी building ना हो, कोई classroom भी ना हो और सबसे रोचक बात, वहाँ class नदी में लगती हो । ये कोई कहानी नहीं है। ये एक सच्चा प्रयास है। केरलम के आलुवा में, साजी वलाशेरिल जी ऐसा ही एक swimming club चला रहे हैं । अब तक 15 हजार से ज्यादा लोग यहाँ तैरना सीख चुके हैं । साजी जी ने दिव्यांग बच्चों को भी swimming सिखाई है । इस प्रयास के पीछे, एक पीड़ा भी छिपी है । कुछ वर्ष पहले, एक नौका हादसे में कई छात्रों की मृत्यु हो गई थी । उस घटना ने साजी जी को भीतर तक झकझोर दिया । उन्होंने सोचा, अगर बच्चों को तैरना आता होता, तो शायद कई जानें बच जातीं - बस यहीं से शुरू हुआ उनका ये अभियान।
नरेन्द्र मोदी ने कहा साजी वलाशेरिल जी का जीवन, हमें एक बहुत बड़ी सीख देता है। सेवा करने के लिए बहुत बड़े साधन जरूरी नहीं होते - जरूरी होता है, एक अच्छा इरादा और लगातार किया गया प्रयास। इन्हीं के दम पर, हजारों लोगों के जीवन में बदलाव लाया जा सकता है । बीते दिनों मुझे Europe के Netherlands जाने का अवसर मिला | वहां मैं कई meeting में शामिल हुआ | इसी दौरान एक ऐसा क्षण आया जिसने हर भारतीय को गर्व से भर दिया | Netherlands में आयोजित एक विशेष समारोह में चोला काल की प्राचीन ताम्र पट्टिकाएं भारत को वापस सौंपी गई | उस कार्यक्रम में Netherlands के प्रधानमंत्री भी मौजूद थे | इन ताम्र पट्टिकाओं को लेकर मुझे देश-विदेश से लगातार संदेश मिल रहे हैं | लोग खुशी जता रहे हैं, गर्व व्यक्त कर रहे हैं | दुनियाभर के तमिल समुदाय में भी इसे लेकर विशेष उत्साह है |।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा इन ताम्र पट्टिकाओं को लेकर लोगों में काफी जिज्ञासा भी है | इसलिए आज मैं इससे जुड़ी कुछ बातें आपसे साझा करना चाहता हूं | इनमें 21 बड़ी और तीन छोटी ताम्र पट्टिकाएं हैं | ये मुख्य रूप से राजा राजेंद्र चोला-प्रथम द्वारा अपने पिता राजा राजराजा चोला के एक वचन को पूरा करने से जुड़ी हैं | इनमें आनइमंगलम् गांव को एक बौद्ध विहार को दान देने का उल्लेख है | इन ताम्र पट्टिकाओं में चोला वंश की उपलब्धियों का भी वर्णन मिलता है | इनसे पता चलता है कि चोला साम्राज्य की समुद्री शक्ति कितनी मजबूत थी | दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ उनके संबंधों की जानकारी भी इनमें मिलती है |
नरेन्द्र मोदी ने कहा चोला साम्राज्य के समृद्ध इतिहास और संस्कृति पर हम सभी को बहुत गर्व है साथि यो, हमारी सरकार भारत की ऐसी अमूल्य धरोहरों के संरक्षण के लिए लगातार प्रयास कर रही है | इसी क्रम में ‘ज्ञान भारतम् अभियान’ के तहत छत्तीसगढ़ के मल्हार में भी एक महत्वपूर्ण खोज हुई है | यहां तीन दुर्लभ ताम्र पट्टिकाएं मिली हैं | ये पांडुवंशी राजवंश के महर्षि बालार्जुन के शासनकाल से जुड़ी मानी जा रही हैं | विशेषज्ञ मानते हैं कि ये inscriptions छठी-सातवीं सदी के हैं यानि चौदह-सौ, पंद्रह-सौ साल पुराने ये ताम्र पट्टिकाएं प्राचीन ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में लिखी गई हैं | इनसे उस समय की शासन-व्यवस्था, धर्म और संस्कृति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है ।