विकसित भारत की यात्रा में बीते वर्ष देश के तेज प्रगति से विकास के वर्ष रहे हैं। जीवन के हर क्षेत्र में, समाज के हर वर्ग को, उनके जीवन में परिवर्तन का एक कालखंड रहा है, एक सही दिशा में, तेज गति से देश आगे बढ़ रहा है। आदरणीय राष्ट्रपति ने बहुत ही बढ़िया तरीके से, पूरी संवेदनशीलता के साथ, उन्होंने इस विषय को हम सबके सामने प्रस्तुत किया है। राष्ट्रपति ने इस देश के मध्यम वर्ग, इस देश के निम्न मध्यम वर्ग, इस देश के गरीब, इस देश के गांव, इस देश के किसान, महिलाएं, विज्ञान हो, प्रौद्योगिकी हो, कृषि हो, सभी विषयों को लेकर के बहुत ही विस्तार से भारत के प्रगति का एक स्वर संसद में गूंजा है। देश के नौजवान भारत के सामर्थ्य को कैसे आगे बढ़ा रहे हैं, इसकी भी विस्तार से चर्चा की है। हर वर्ग के सामर्थ्य को उन्होंने शब्दांकित किया है, और इतना ही नहीं, आदरणीय राष्ट्रपति ने भारत के उज्ज्वल भविष्य का प्रति एक विश्वास व्यक्त किया है, ये अपने आप में, हम सबके लिए प्रेरक है।
21वीं सदी का प्रथम क्वार्टर पूरा हो चुका है, लेकिन ये दूसरा क्वार्टर जैसे पिछली शताब्दी में भारत की आजादी के जंग में दूसरा क्वार्टर बहुत ही निर्णायक रहा था। मैं साफ़-साफ़ देख रहा हूं कि विकसित भारत के निर्माण की दिशा में ये दूसरा क्वार्टर भी उतना ही सामर्थ्यवान होने वाला है, उतना ही तेज गति से आगे बढ़ने वाला है। राष्ट्र का हर व्यक्ति ये महसूस कर रहा है कि, एक अहम पड़ाव पर हम पहुंच चुके हैं, अब ना हमें रुकना है, ना हमें पीछे मुड़कर के देखना है, अब हमें आगे ही आगे देखना है, और तेज गति से चलना है, और लक्ष्य को प्राप्त करके ही हमें सांस लेनी हैं, उसे दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं। वर्तमान में अगर हम देखें तो भारत के भाग्य के अनेक सुयोग एक साथ हमें नसीब हुए हैं। ये अपने आप में बहुत ही उत्तम संयोग है ऐसा मैं मानता हूं। सबसे बड़ी बात है, विश्व के समृद्ध से समृद्ध देश भी बुजुर्ग होते जा रहे हैं, वहां की आबादी उर्म के उस पड़ाव पर पहुंची है, हम जिन्हें बुजुर्ग के रूप में जानते थे। हमारा देश ऐसा है, जो विकास की नई ऊंचाइयां छू रहा है, उसी समय दिनों-दिन हमारा देश युवा होता जा रहा है, युवा आबादी वाला देश है, ये अपने आप में एक बहुत अच्छा सुयोग है। दूसरी तरफ मैं देख रहा हूं, जिस प्रकार से विश्व का भारत के प्रति आकर्षण बढ़ा है, और उसमें भी विश्व भारत के टैलेंट का माहात्म्य समझ रहा है। हमारे पास आज दुनिया का बहुत ही महत्वपूर्ण टैलेंट पूल है, युवा टैलेंट पूल है, जिसके पास सपने भी हैं, संकल्प भी है, सामर्थ्य भी है, और इसलिए ये दूसरा सुयोग है, शक्ति का आशीर्वाद हमारे साथ है।
भारत आज विश्व में जो चुनौतियां पैदा हो रही हैं, उन चुनौतियों का समाधान देने वाला एक देश आशा की किरण बना हुआ है, और हम समाधान दे रहे हैं। वैसा एक महत्वपूर्ण सुयोग है कि आज मेजर इकोनॉमी में भारत का ग्रोथ बहुत हाई है, और हाई ग्रोथ और लो इन्फ्लेशन, ये बहुत ही यूनिक संयोग है, और ये हमारी अर्थव्यवस्था की मजबूती को प्रदर्शित करता है। हम जिस गति से आगे बढ़ रहे हैं, जब हमें देश की जनता ने सेवा करने का मौका दिया, तब ‘Fragile Five’ के रूप में ये देश जाना जाता था, जब हमें अवसर मिला तब, देश आजाद हुआ तब हम दुनिया में 6 नंबर की इकोनॉमी थे लेकिन इन लोगों ने ऐसे हाल करके रखा कि 11 पर पहुंचा दिया, आज हम तीन पर जाने की दिशा में तेज गति से आगे बढ़ रहे हैं।
आज कोई भी सेक्टर देख लीजिए चाहे साइंस हो, चाहे स्पेस हो, चाहे स्पोर्ट्स हो, हर क्षेत्र में आज भारत एक कॉन्फिडेंस के साथ, आत्मविश्वास से भरा हुआ भारत है। कोविड के बाद विश्व में जो स्थितियां पैदा हुई, और ऐसी नई-नई चीजें जुड़ती गई, आज दुनिया संभल नहीं पा रही है, ऐसे में साफ-साफ नज़र आ रहा है कि दुनिया एक नए ग्लोबल ऑर्डर की तरफ, नए वर्ल्ड ऑर्डर की तरफ आगे बढ़ रहा है। सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद, एक वर्ल्ड ऑर्डर बना था, अब एक नए वर्ल्ड ऑर्डर की तरफ विश्व बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है, और सबसे बड़ी खुशी की बात है, सारी घटनाओं का अराजनीतिक तरीके से, निष्पक्ष भाव से विश्लेषण करेंगे, तो झुकाव भारत की तरफ है। विश्व मित्र के रूप में, विश्व बंधु के रूप में, आज भारत अनेक देशों का विश्वस्थ पार्टनर बना है, और हम कंधे से कंधा मिला करके, विश्व कल्याण की दिशा में भी अपनी उचित भूमिका निभा रहे हैं, अपने सामर्थ्य से सहाय भी कर रहे हैं।
आज पूरा विश्व ग्लोबल साउथ की चर्चा करता है, लेकिन उस चर्चा के सूत्रधार के रूप में आज भारत वैश्विक मंचों पर ग्लोबल साउथ की बुलंद आवाज बन गया है। अनेक देशों के साथ आज भारत ‘फ्यूचर रेडी ट्रेड डील्स’ कर रहा है। पिछले कुछ ही समय में दुनिया के महत्वपूर्ण 9 बड़े देशों के साथ, 9 बड़े, हमारे ट्रेड डील हुए हैं, और उसमें “Mother of all Deals” एक साथ 27 देश के साथ, यूरोपियन यूनियन के साथ। जो लोग थक गए, बेचारे चले गए, लेकिन कभी ना कभी उनको जवाब देना पड़ेगा कि देश की ऐसी हालत कैसे बना कर रखी थे कि दुनिया का कोई देश हमसे डील करने के लिए आगे नहीं आता था। आपने कोशिश की होगी, पीछे-पीछे-पीछे बहुत चक्कर लगाए होंगे, लेकिन किसी ने आपकी तरफ देखा भी नहीं होगा। क्या स्थिति ऐसी पैदा हुई? दुनिया के देश ऐसे ही भारत के साथ डील नहीं कर रहे हैं।
इसके पीछे सबसे बड़ी बात डेवलप्ड कंट्रीज, एक डेवलपिंग कंट्री के साथ डील करता है ना, वो अपने आप में भी अर्थ जगत के लिए एक बहुत बड़ा संदेश है और मेरे लिए नई बात नहीं है। जब मुझे गुजरात में सेवा करने का अवसर मिला था, तो मैं एक वाइब्रेंट गुजरात समिट करता था और मेरे लिए गर्व की बात थी कि एक स्टेट, हिंदुस्तान का एक स्टेट, मेरे इस वाइब्रेंट समिट की पार्टनर कंट्री डेवलप कंट्री जापान हुआ करता था। एक राज्य ने यह सामर्थ्य दिखाया था, आज मेरा देश यह सामर्थ्य दिखा रहा है। यह तब होता है, जब आपके पास आर्थिक सामर्थ्य हो, आपके पास आपके नागरिकों के अंदर देशवासियों में एक ऊर्जा हो और खास करके मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम हो, तब जाकर के विश्व आपके साथ डील करने के लिए आगे आता है। वोट बैंक की राजनीति में डूबे हुए लोगों ने कभी भी देश के ऐसे अनेक पहलुओं पर मजबूती देनी चाहिए, यह कभी उनकी प्राथमिकता नहीं रही और उसी का परिणाम है। और जहां तक कांग्रेस पार्टी का सवाल है, मैं साफ-साफ कहना चाहता हूं और मेरे शब्दों पर भरोसा नहीं है, तो मैं देश के लोगों को कहूं कुछ मत करो, सिर्फ लाल किले से कांग्रेस के प्रधानमंत्रियों के जो भाषण है, सिर्फ उन भाषणों के एनालिसिस कर लो, आपको साफ-साफ लगेगा कि ना उनके पास कोई सोच थी, ना उनके पास कोई विजन था और ना ही कोई इच्छाशक्ति थी और इसका परिणाम है कि देश को इतना भुगतना पड़ा।